Self development

                    

                        4 कदम : स्वयं की बेहतरता के लिए

Law of Attraction
" हमको मन की शक्ति देना मन विजय करे
     दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें"
 कुछ याद आया..... जी हां सही पहचाना, ये उसी  प्रार्थना की लाइने है जो कभी हम स्कूल असेंबली में किया करते थेबस फर्क सिर्फ इतना है कि तब हम इसके मतलब नहीं समझते थे और जब इसके मायने समझने के काबिल हुए तब तक ये प्रार्थना भूल चुके थे..... 
आइये आज  इस प्रार्थना को फिर से याद करते हैं और स्वयं को पहचानने की कोशिश करते हैं।  अब आप सोचेंगें की स्वयं को पहचानने की क्या ज़रूरत है ? तो खुद की जय करने के लिए खुद को उस 'जय' के काबिल भी तो बनाना पड़ेगा

 हम हमेशा दूसरों को समझने की जानने की कोशिश करते रहते हैं दूसरों की कमियों को, बुराईयों को ढूंढ-ढूंढ कर निकालते हैं और उन्हें नसीहतें देते हैं ताकि वे सही रास्ता चुन सकेंपर बड़े ही अफ़सोस की बात है की इस जद्दोजेहद में हम स्वयं की तरफ तो ध्यान ही नहीं देते कि दरअसल बदलाव की ज़रूरतबेहतर बनने की ज़रूरत तो हमें भी है.... अब अगर हम सब इस विचार पर एक मत हैं तो अब बात आती है कि  शुरुआत कहाँ से करें... ? ये सवाल जितना पेचीदा है इसका जवाब उतना ही सीधा हैहम सब जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति का वजूद उसके विचारों से बनता है पर अजीब बात ये है कि  हम दूसरों के विचारों पर तो बड़ी आसानी से टिप्पणी कर देते हैं पर कभी खुद के विचारों की ओर देखते ही नहीं या ये कहना ज़्यादा सही होगा की हमारे कान हमारे खुद के विचारों को तो सुन ही नहीं पातेतो इसके लिए हमें क्या करना चाहिएतो चलिए आगे जानते हैं ;

1. अपने विचारों को लिखें

Write your thoughts
डॉयरी लेखन के बारे में तो हम सब  जानते ही हैं.… कई लोगों की आदत होती है कि अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में घटने वाली घटनाओं को वो डॉयरी में लिखते हैं.… पर मेरी सलाह यह है कि यदि आप कल से बेहतर बनना चाहते हैं तो अपने विचारों को भी एक डॉयरी में लिखें। विचारों पर हमारा कोई वश नहीं चलता पर इतना ज़रूर कहूँगा कि आमतौर पर हमारे मन में उठने वाले जिन विचारों को हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं अगर उन्हें लिखने लगें तो हमारी सोच का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा भी होगा जिसे  हम कागज़ पर लिख तक  नहीं पाएंगे और ये इसलिए नहीं कि हमें उन्हें लिखना नहीं आता बल्कि इसलिए क्योंकि हमारे मन मेंऐसे भी कई विचार उठते होंगें जिन्हें हम खुद लिखना ही नहीं चाहेंगे क्योंकि ऐसी कई बातें होती हैं जिनका एहसास हमें वैसे नहीं होता, उन विचारों में छुपी नकारात्मकता, हमारी विकृत मानसिकता को हम पहचान भी नहीं पाते और जब हम अपने विचारों को लिखने बैठते हैं तो उनकी गहराइयाँ, हमारी सोच पर होने वाले उनके दुष्प्रभाव, हमारे जीवन में होने वाले उनके दुष्परिणामों को हम नज़रअंदाज़ नहीं कर पाते इसलिए आप लिखना चाहें या चाहें फिर भी मैं यही कहूँगा कि आप अपने विचारों को कागज़ पर ज़रूर लिखिए और रात को सोने से पहले उन्हें ज़रूर पढ़िए....यकीन मानिये ये फार्मूला अगले ही दिन काम करेगा और आप देखेंगे कि आपके ज़हन में वो विचार दोबारा आएंगे तो ज़रूर उनकी शुरुआत में ही आप उन पर अंकुश लगा देंगे और धीरे-धीरे अपने ऐसे विचारों से आप हमेशा के लिए मुक्ति पाने में कामयाब होंगे .... याद रखिये जीवन, समाज में अगर कुछ अच्छे बदलाव लाना चाहते हैं तो सबसे पहले ज़रूरत है अपने विचारों की शुद्धि करना क्योंकि विचार कब हकीकत का रूप लेकर आपके समक्ष खड़े हो जाएँ पता भी नहीं चलता....इसलिए अच्छे विचारों का स्वागत करें और बुरे विचारों पर अंकुश लगाऐ ...

2. तो अहंकारी बने और ही डोर-मैट [कमज़ोर]

Balance your life
हमने बहुत बार बड़े-बुज़ुर्गों से सुना है कि "इतने मीठे मत बनो कि कोई गुड समझ कर निगल जाये और इतने कड़वे भी मत बनो कि कोई थूक कर जाये।" इस कहावत का सीधा सम्बन्ध हमारे स्वाभाव से है। 
अहंकार एक ऐसा विष है जो आपके सारे गुणों को सारी अच्छाइयों को विषैला कर देता है।  सिर्फ इतना ही नहीं आपकी मेहनत और लगन सफलता के जिस शिखर पर आपको पहुंचती है, कुछ क्षणों का अहंकार आपकी उसी मेहनत को ख़ाक कर देता है और आपको अर्श से फर्श पर गिरा देता है। अहंकारी व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता क्योंकि मनुष्य का अहंकार उसे किसी से मित्रता करने ही नहीं देता। इसलिए कभी भी अहंकार को अपना मित्र समझने की ग़लती कभी करें क्योंकि अहंकार एक ऐसा शत्रु है जो मित्र के भेष में आता है और मनुष्य के समस्त गुणों का नाश कर देता है, इसलिए अहंकार से सावधान रहना बेहद आवश्यक है। 
दूसरी ओर किसी व्यक्ति को इतना भोला भी नहीं होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति उसका नाजायज़ फायदा उठाए या उसके भोलेपन काउसकी अच्छाइयों का ग़लत तरीके से इस्तेमाल करे.… यह सिर्फ खुद हमारे लिए बल्कि दूसरों के लिए, समाज के लिए भी विनाशकारी हो सकता है , इसलिए कभी किसी को भी अपनी अच्छाइयों का गलत फायदा उठाने दें और अहंकारी बनें, ही इतने कमज़ोर कि कोई भी डोर-मैट की तरह आपको इस्तेमाल करे .... 

3. स्वयं को अथवा दूसरों को सम्मान दें 
Respect yourself and others
हमने अक्सर अपने बड़े-बूढों से सुना है कि जैसा व्यवहार आप स्वयं के साथ हैं वैसा ही दूसरों के प्रति व्यवहार करना चाहिये....ये बिल्कुल सच है।  यदि हम दूसरों के गुणों का सम्मान करेंगें , दूसरों की कदर करेंगे तो हमें भी बदले में दूसरों से कदर और सम्मान ही मिलेगा। इसलिए हमें कभी किसी का मज़ाक नहीं बनाना चाहिए या किसी के आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए।  दूसरी ओर हमारा स्वयं के प्रति भी यह फ़र्ज़ बनता है कि हम स्वयं का भी सम्मान करें और किसी को भी खुद का अपमान करने का मौका दें क्योंकि चाहे ज़िन्दगी में आगे बढ़ना हो या किसी भी क्षेत्र में, आगे बढ़ने के लिए मनुष्य में आत्मविश्वास के साथ-साथ आत्सम्मान होना भी बेहद ज़रूरी है क्योंकि हमारा आत्मसम्मान ही हमें स्वयं के साथ अथवा दूसरों के साथ हो रहे गलत व्यवहार के प्रति आवाज़ उठाने की और अपने  अधिकारों के लिए लड़ने की हिम्म्मत देता है। इसलिए स्वयं को अथवा दूसरों को सम्मान दें.…      

4. कभी अपनी ज़िम्मेदारी से भागें 

Take Responsibility
यदि आप अपने परिवार मेंसमाज में, स्वयं की नज़रों में खुद को एक नायक के तौर पर प्रस्तुत करना चाहते हैं तो कभी अपनी ज़िम्मेदारियों से भागें।  आचार्य चाणक्य ने कहा है कि 

"सच्चा नायक कभी अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं भागताअगर जीत का श्रेय उसे मिलता है तो हार की ज़िम्मेदारी भी वह स्वयं पर ही लेता है.… "

हमें यह बात मान कर चलना चाहिए की कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण नहीं होता इसलिए किसी के भी लिए गए फ़ैसले गलत अथवा सही हो सकते हैं।  परन्तु एक नायक की पहचान यही है कि वह अपने गलत फैसलों की ज़िम्मेदारी लेते हुए उनसे सीखता है और आगे बढ़ता है।  इससे उसका लिया हुआ हर सही फैसला उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और हर गलत फैसला उसे पहले से बेहतर बनाता है..... इसलिए स्वयं को बेहतर बनाने के लिए हमें भी इसी धारणा को अपनाना चाहिए

      याद रखिये खुद की जय , जयकार भी हम तभी कर सकते है जब हम इस लायक हो और इस लायक बनने के लिए पहला कदम है कि व्यक्ति स्वयं को पहचाने।  जिस दिन हमने स्वयं को पहचानना शुरू कर दिया उस दिन सही मायने में इस प्रार्थना के अर्थ समझ पाएंगे और अपने जीवन में उतार भी पाएंगे 

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