think before you act

  सोच-समझकर काम करना चाहिए

Cleaning

मनु शाम को खेलकर जब घर लौटी तो देखा उसके पापा बाजार से लाए कुछ फल-सब्जियाँ आदि फ्रिज में रखे रहें हैं। वह तभी अंगूर निकालकर खाने लगी। जब पापा ने उसे ऐसा करते देखा तो वे उसे डाँटते हुए बोले, ”मनु! तुम अभी-अभी पार्क से खेलकर आई हो और बिना धोए ही अंगूर खाने लगीं। यह बहुत बुरी बात है। जाओ, इन्हें धो और अपने हाथ भी। गंदे हाथों से खाने की चीज भी गंदी हो जाती है।“
“साॅरी, पापा !“ कहकर मनु रसोई की ओर चल दी।
अब वह हमेशा फलों को धोकर ही खाती और अपने हाथों को भी साफ रखती। एक दिन मनु के घर उसके चाचा-चाची आए। रसोईघर में मम्मी ने मनु को एक प्लेट में समोसे रखकर लाने को कहा और चली र्गईं। प्लेट में समोसे रखने के बाद मनु ने सोचा, ‘मुझे पहले अपने हाथ धोने चाहिए थे। तो क्या हुआ? अब धो लेती हूँ। जैसे ही उसने  हाथ धोए, उसेने सोचा मैंने गंदे हाथों से समोसे भी गंदे हो गए होंगे।‘ ऐसा सोचकर उसने समोसे धो डाले और उन्हें वापस प्लेट में रख कर दिया।
जैसे ही वह प्लेट लेकर  गई तो समझ नहीं पा रही थी कि माँ उसे गुस्से से क्यों देख रही थीं जबकि बाकी सब ठहाका लगाकर हँस पडे़ थे। तभी तो कहा जाता है कि हमें हर कामसोच-समझकर करना चाहिए।

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