माफ़ी मांगने में कैसा परहेज़

                                                         माफ़ी मांगने में कैसा परहेज़

Maafi

हम अक्सर अपने बच्चों को सीखाते हैं कि जब किसी से कुछ लो तो उन्हें थैंक्यू या धन्यवाद करना चाहिए और अगर कभी गलती हो जाये तो माफ़ी मांगनी चाहिए …… लेकिन बच्चों को सोरी और थैंक्यू बोलना सीखाते-सीखाते हम बड़े क्यों भूल जाते हैं….ख़ासकर माफ़ी मांगना।
थैंक्यू ,सोरी जैसे शब्द हमेशा से ही शिष्टाचार की निशानी माने जाते है। जितने छोटे ये शब्द लिखने अथवा बोलने में है, जीवन में इनका महत्व उतना ही ज़्यादा है। थैंक्यू , शुक्रिया , धन्यवाद तो हम आम तौर पर हम कई जगह इस्तेमाल कर लेते है फिर माफ़ी मांगने से क्यों हम परहेज़ करते हैं , स्वयं की गलती होने पर भी।
आमतौर पर कहा जाता है कि ज़्यादातर पुरुष माफ़ी मांगना अपनी तौहीन समझते है….पर ऐसा बिलकुल नहीं है, कई दफ़ा महिलाएं भी माफ़ी मांगने को अपनी तौहीन समझती है.…… शायद आप मेरी बात से सहमत न हो पर मेरा अपना तजुर्बा तो यही कहता है कि पुरुष हो या महिलाएं माफ़ी का एक शब्द बोलना दोनों के लिए ही बेहद मुश्किल या अपमानजनक होता है।
आपने बड़े-बुज़ुर्गों को अक्सर ये कहते सुना होगा कि अपनी गलती की माफ़ी मांगने से कोई छोटा नहीं होता…फिर भी हम क्यों माफ़ी मांगने से कतराते हैं, ख़ासकर उनसे जो हमारे बेहद करीब होते है और हमसे स्नेह करते हैं।
तो चलिए आज जानते हैं ऐसी पांच वजह जो हमें अपनी ग़लती स्वीकार करने से रोकती हैं।

1. अहंकार

अहंकार पुरुषों में हो या महिलाओं में हर सूरत में नुकसानदायक तथा मनुष्य का शत्रु ही होता है। अहंकार एक बहुत बड़ी वजह है जो हमें हमारी गलति स्वीकार नहीं करने देता और याद रखिये अगर हम अपनी गलती स्वीकार नहीं कर सकते तो हम कभी अपनी गलती को सुधार भी नहीं सकते।
ये जानते हुए भी गलती हमारी स्वयं की हैं और हमारे माफ़ी मांगने से बहुत कुछ बिगड़ने से बच सकता है फिर भी हम अपने अहंकार वश होकर माफ़ी का एक लफ्ज़ कहना कुबूल नहीं करते फिर चाहे इससे कितने ही लोगों की भावनाऐ को ठेस पहुँच रही हो ।
अपने अहंकार को हमें कभी भी स्वयं पर हावी नहीं होने देना चाहिए…….इसलिए अपने अहंकार को कभी इतना बड़ा मत होने दीजिये कि हमें किसी की भावनाएं नज़र ही न आएं।

2. कमज़ोरी की निशानी

अक्सर हम माफ़ी मांगने को कमज़ोरी की निशानी समझ बैठते हैं, हमें लगता है कि अगर हम अपनी गलती की माफ़ी मांगेंगे तो समाज, लोग या हमारे करीबीजन हमें कमज़ोर समझेंगे और आजीवन सबकी नज़रों में हमारी छवि एक कमज़ोर इंसान की बन कर रह जाएगी।
पर यक़ीन मानिये ऐसा कभी नहीं होता माफ़ी मांगना कभी भी कमज़ोरी की निशानी नहीं होती बल्कि माफ़ी मांगना तो समझदार और जिम्मेदार मनुष्य की ख़ूबी होती है …….इसलिए अपनी ग़लती के लिए कभी भी माफ़ी मांगने से परहेज़ न करें।

3. दुसरा तरीक़ा अपनाना

अक्सर ऐसा भी होता है कि हमें अपनी ग़लती का एहसास तो होता है पर हम माफ़ी नहीं मांगना चाहते और ऐसे में हम दुसरे तरीक़े अपनाते हैं जैसे गिफ्ट देना या ख़ास ख्याल रखकर भी हम अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं …… पर याद रखें शायद इस तरीक़े से हम किसी को स्पेशल महसूस करवा देते हों, सामने वाला हमारी भावनाएं समझ भी जाता हो पर माफ़ी का एक शब्द बोलकर जो इज़्ज़त हम कमा सकते है वो गिफ्ट देकर या किसी का ख़ास ख़याल रखकर कभी नहीं कमा सकते …… क्योंकि जितना असर माफ़ी का एक शब्द करता है वो कुछ और नहीं कर सकता।

4. अस्वीकृति का डर

ज़्यादातर देखा जाता है कि हम माफ़ी मांगने से परहेज़ इसलिए भी करते हैं क्योंकि हमें अस्वीकृति का डर होता है.…हमें लगता है कि कहीं हमारे अपनी भूल स्वीकार करने से स्थितियां बद से बदत्तर न हो जाऐ और इसी डर से हम भावनाओं की उधेड़बुन में लगे रहते हैं और ये तय ही नहीं कर पाते कि माफ़ी मांगें या नहीं।
माफ़ी मांगने से हो सकता है कुछ समय के लिए हालात हमारे पक्ष में न रहें पर याद रखिये कोई भी स्थिति हमेशा के लिए बरक़रार नहीं रहती , जल्द ही हालात सामान्य हो जाते हैं और माफ़ी भी मिल जाती है।

5. सामना करने से बचना

कभी-कभी किसी के माफ़ी न मांगने की वजह सामने वाले व्यक्ति का स्वाभाव भी होता है। कई लोगों की मानसिकता ऐसी होती है कि यदि कोई उनसे अपनी गलती की माफ़ी भी मांगे तो भी वह उन्हें सबक सिखाने की मंशा से लड़ाई-झगड़ा करते हैं, बेइज़्ज़ती करते हैं, शर्मिन्दा करते हैं और ऐसे में व्यक्ति माफ़ी मांगने से परहेज़ ही करते है फिर चाहे उसे अपनी ग़लती का एहसास ही क्यों न हो।
माफ़ी मांगने को लेकर अपने ज़हन में कोई ग़लत फहमी न रखे और याद रखिये माफ़ी मांगना तौहीन की नहीं बल्कि समझदारी, जिम्मेदारी और बड़प्पन की निशानी है और दूसरी ओर माफ़ी देना बड़प्पन और सकरात्मक सोच की निशानी हैं …… इसलिए माफ़ी मांगने से कभी परहेज़ न करें। स्वयं की ग़लती हो तो माफ़ी मांग लें और अगर कोई आपसे माफ़ी मांगे तो माफ़ कर दें …… क्योंकि दिल से माफ़ी के एक शब्द में बहुत ताकत होती है….।



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