habits of successful people

                “ख़ुशहाल जीवन चाहिए… तो छोड़नी होगी कुछ आदतें”



आपने अक्सर ये सुना होगा कि कुछ आदतों को अपनाकर हम न सिर्फ तनावमुक्त रह सकते हैं बल्कि एक ख़ुशहाल जीवन की शुरुआत भी कर सकते हैं…. लेकिन कभी आपने सोचा है कि हम सब में कुछ ऐसी आदतें भी है जिन्हें हम छोड़ दें तो हम अपनी ख़ुशी को चार गुना बढ़ा सकते हैं।
आज हम बात करेंगे ऐसी आदतों के बारे में जो हमारी ख़ुशी को दीमक की तरह खा जाती है और इन पर कभी हमारा ध्यान ही नहीं जाता और अगर चला भी जाये तो अक्सर हम इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
याद रखिये खुश रहने के लिए अगर हमें कुछ आदतों को अपनाने की ज़रूरत है तो उस ख़ुशी को बरकरार रखने के लिए कुछ आदतों को छोड़ना भी बहुत ज़रूरी है।

1. अव्यवस्थितता और आलस्य
वक्त की कमी की शिकायत तो हम सब ही करते है….फिर भी हमारा आलस दिन के कितने घंटे बरबाद कर देता है, इन सबके पीछे है हमारी अव्यवस्थितता और आलस, इसलिए इन दोनों को ही अपने जीवन से निकाल फेंकने की ज़रूरत है। आपने कभी सोचा है की एक कामयाब इंसान और हमारे बीच क्या फर्क है ? हम हमेशा वक्त की कमी की शिकायत करते हैं और वो उसी वक्त का ज़्यादा से ज़्यादा सही उपयोग कैसे करना है ये सोचते हैं।

2. चिंता करना
बेवजह की चिंता करना हमारे स्वभाव का एक हिस्सा बन गया है और ये चिंता हर इंसान की ज़िन्दगी में दुख का बहुत बड़ा कारण है। ख़ुशियाँ हमारी ज़िन्दगी में आती तो हैं पर हमारी व्यर्थ की चिंता उन खुशियों को भी दुख में बदल देती है। चिंता हमारा पूरा ध्यान चुरा लेती है और हमें इस भ्रम में डाल देती है की हम किसी समस्या से गुज़र रहे हैं, जबकि ऐसा होता नहीं है। इसलिए व्यर्थ की चिंता को अपनी खुशियों के बीच न आने दें ।

3. अतीत और भविष्य की सोच
आम तौर पर देखा जाता है कि इंसान या तो अतीत की ग़लतियों पर पछताता रहता है या भविष्य की योजनाएं बनाता रहता है, जबकि होना तो ये चाहिए कि अतीत की ग़लतियों से सीख कर आगे बढ़ें और वर्तमान में कुछ ऐसा करें कि सुखद भविष्य का निर्माण कर सकें क्योंकि अतीत को कोई नहीं बदल सकता और भविष्य सिर्फ योजनाएं बनाने से नहीं कर्म करने से बनता है। इसलिए अतीत और भविष्य में जीना छोड़ दें और अपने वर्तमान को बेहतर बनाऐ क्योंकि ये वर्तमान ही है जो भविष्य का निर्माण करता है।

4. स्वयं की तुलना दुसरों से करना
हम हमेशा दूसरों से अलग बनने, अलग दिखने की कोशिश करते हैं, जबकि सच तो ये है कि हम सबसे अलग ही हैं, न तो कोई हमारे जैसा है और न ही हो सकता है…. इसलिए खुद की तुलना दूसरों से करना या खुद के काम की तुलना किसी की कामयाबी से करना कभी सही नहीं हो सकता, ऐसा करना हमें हमारे लक्ष्य से भटका देता है। होना तो ये चाहिए कि हम दुसरों के काम से सीखें और खुद को बेहतर बनाऐ न की हीन भावना का शिकार हो जाएँ, इसलिए ऐसी ग़लती कभी न करें।

5. हर चीज़ से डरना
‘डर’, बचपन से ही हम कई किस्मों के डरों से घिरे हुए हैं, उस वक्त भी जब हमें डर का मतलब ही नहीं पता था, पढ़ाई का, करियर का, नौकरी का, खेलने से पहले ही हारने का डर और न जाने कितने ही डरों से हम हर वक्त घिरे रहते हैं… डर एक बहुत बड़ी वजह है जो हमें आगे नहीं बढ़ने देता, चाणक्य ने डर के बारे में कहा है ;
” डर से तब तक डरो जब तक वो आपसे दूर है, जब वो आपके सामने आ जाए तो उसका मुकाबला करो क्योंकि यही एकमात्र तरीका है डर पर विजय प्राप्त करने का।”

ये सिर्फ कुछ आदतें हैं जिनसे हमें परहेज़ करना चाहिए जीवन मैं आगे बढ़ने के लिए और खुश रहने के लिए, ऐसी और भी बहुत सी आदते होंगी पर फ़िलहाल शुरूआत यही से करते है अपनी आदतें बदलने की।

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