मान के हारे हार है, मान के जीते जीत importance of positivity

सकारात्मक जीवन का रहस्य









जीवन क्या है?जीवन अद्बुध एवम् जटिल समस्याओं से भरा एक लंबा सफ़र हैं I इसे जीना भी एक कला है I

हर इंसान के जीवन जीने का ढंग अलग-अलग होता है I वैसे ही जीवन जीने के प्रति सबका दृष्टिकोण भी अलग होता है I कोई इसे जिंदादिली के साथ जीता है तो कोई नकारात्मक सोच के साथ I जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते है उसी प्रकार जीवन जीने के भी दो पक्ष होते है, पहला सकारात्मक तो दूसरा नकारात्मक I दोनो ही जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष है I दोनो ही जीवन मे साथ-साथ चलते हैं I हमारी सोच हमारे विचार समय और परिस्थितियो के पराधीन है I ये दोनो चीज़े इंसान के मानसिक संतुलन पे भी निर्भर करता है कि वो कौन सा रुख़ अपनाता है I दोनो का ही अपना अलग महत्व हैं I अंतर सिर्फ़ इतना है जहाँ  सकारात्मक सोच हमारे जीवन को साहस, उत्साह  और उमंग से भर देती है वही नकारात्मक सोच हमारे जीवन को निराशा और अंधेरे की ओर धकेलती है I नकारात्मक सोच मनुष्य की दुर्बलता और कर्मठहीनता को दर्शाता है वही दूसरी ओर सकारात्मक सोच वाले मनुष्य को देख कर कोई भी इंसान जोश से भर जाता है I

सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हर परिस्थितियो का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहते है I ऐसे व्यक्ति सभी मुश्किलो को पार कर अपनी मंज़िलो को पा लेते हैं I उनका जीवन संघर्षो से ज़रूर भरा रहता है लेकिन अपने सारे संघर्षो को पार कर के अपने लक्ष्य की ओर कदम दर कदम बदते रहना उनका उदेश्य होता है I उनका ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित होता है जिससे उन्हे हर मुश्किल को पार करने की ताक़त मिलती है I अगर हम इतिहास उठा कर देखे तो हमे ऐसे कई उदाहरण मिल जाएँगे जिन्होने जीवन के प्रति सकारात्मक सोच अपना कर अपने लक्ष्यो को प्राप्त किया I महात्मा गाँधी अगर ये सोच कर बैठ जाते कि गुलामी उनके जीवन मे लिखी हैं तो आज क्या हम आज़ाद होते ? अमिताब  बच्चन का जीवन भी काफ़ी संघर्षो से भरा था यदि वो अपने संघर्षो से हार मान जाते तो आज इतने बड़े अभिनेता नही होते I स्वर  कोकिला लता मंगेशकर ने अपने जीवन मे कम कठिनाई नही देखी है लेकिन क़ठिनाइयो को पार करके ही आज उन्हे स्वर कोकिला का खिताब मिला है I

नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अभावो के साथ जीवन जीना सीख लेते हैं I ऐसा वयक्ति सोचता है कि उसके जीवन में जो भी घटनाएँ घट रही है वह सब उसके भाग्य मे लिखी हैं और उसे बदला नही जा सकता I ऐसा इंसान भाग्य के भरोसे बैठा रहता हैं I नकारात्मक व्यक्ति अपनी उन्नति के अवसर को भी ठोकर मार देते है I ऐसे कितने ही उदाहरण मिल जाएँगे जो अपनी दीन हीन स्थिति में रहना पसंद करते हैं I

जीवन में सुख दुख , धूप छाँव या जीत हार दोनो साथ साथ चलते हैं I लेकिन हमें अपने दुखो से या अपनी हार से हार नही मानना चाहिए बल्कि  अपनी तकलीफ़ों से एक नया सबक लेते हुए आगे निकलना चाहिये I तभी हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगे I

कहा भी गया है :
मान के हारे हार है, मान के जीते जीत!!

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