खुद की जाँच



एक बार पीसीओ बूथ से एक लड़का फोन कर रहा था। वह फोन पर किसी महिला से बात कर रहा था। बूथ का मालिक बैठा हुआ उसकी बातें सुन रहा था।
लड़का कह रहा था- “मैं आपके लान (बगीचा) की सफ़ाई कर सकता हूँ, मुझे  काम की जरूरत है। क्या आप मुझे काम देना पसंद करेंगी?”
 
महिला ने प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए कहा कि उसके लान की सफ़ाई करने के लिए एक कर्मचारी पहले से ही नियुक्त है। लड़के ने पुनः अनुरोध किया कि वह उतने ही पैसे में लान (बगीचा)  की सफ़ाई कर देगा, जितने में पहले वाला कर्मचारी कर रहा है। महिला ने इस बार भी मना कर दिया।
             
लड़के ने हार नहीं मानी, वह बोला कि वह उतने ही पैसे में लान (बगीचा)  की सफ़ाई के साथ और भी कोई काम करने को तैयार है। महिला ने जवाब दिया कि वह अपने वर्तमान
कर्मी से संतुष्ट है और फि़लहाल उसे बदलने का कोई इरादा नहीं रखती। आखि़रकार लड़के ने फोन रख दिया और दुकानदार को पैसे देकर जाने लगा।

दुकानदार ने उसे रोकते हुए कहा- “मुझे तुम्हारा दृढ़ निष्चय पसन्द आया मैं तुम्हें काम देने के लिए तैयार हूँ।लड़के ने मुस्कराते हुए दुकानदार का शुक्रिया अदा किया और कहा-“श्रीमान् जी ! मैं आपका शुक्रगुजार हूँ, लेकिन मैं अभी जिस महिला से बात कर रहा था, उनके लान (बगीचा)  की सफ़ाई का काम मैं ही करता हूँ। यह सब बात तो मैंने केवल यह जानने के लिए की थी कि वे मेरे काम से संतुष्ट हैं या नहीं। इससे मुझे अपने आप में सुधार लाने का मौक़ा मिलता है।

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