निर्णय

गाँव के एक बच्चे ने एक संत को पराजित करने का मन बनाया। इसके लिए उसने एक बचकानी योजना तैयार की। उसने एक पक्षी को अपने हाथ में पकड़ा और संत के पास चल पड़ा।
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उसकी योजना थी कि वह सबके सामने संत से पूछेगा कि पंछी जीवित है या मृत? यदि संत का जवाब ’मृत‘ होगा तो तुरन्त पंछी को उडा़ देगा और यदि संत ने कहा कि पंछी जीवित है, तो चुपचाप पंछी की गर्दन दबा देगा और इस प्रकार संत को गलत सिद्ध कर देगा।
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जब लड़का संत के पास पहुँचा तो गाँव के तीस-चालीस आदमी संत के पास बैठे थे। लड़के जा कर अहंकार भरे स्वर में कहा-“यदि आप सब कुछ जानते हैं, तो मुझे बताइये कि मेरे हाथ में जो पंछी है, वह मृत है या जीवित?”
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संत उसका सवाल सुन कर मुस्कराए और धैर्य पूर्वक बोले-“ये पंछी तुम्हारे हाथ में है, इसका वही होगा जो तुम चाहोगे।”
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संत के जवाब से लड़के को अपनी भूल का अहसास हुआ और उसने कभी  भविष्य मे ऐसा न करने का प्रण लिया।
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हमारा जीवन भी हमारे हाथ में है व सही-ग़लत का फै़सला भी।

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