’कोई किसी से कम नही’

आज के भागदौड़ भरे इस जीवन में हम अपने आप को भूलते जा रहे हैं। एक दूसरे से आगे निकलने की एक होड़ सी लगी हुई। लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें जाना कहाँ है? बस दूसरे को देखा-देखो चले जा रहे हैं। अगर हमें अपनी मंजिल का ही पता नहीं होगा तो फिर हम उस तक पहुचेंगे  कैसे।
.
हमें अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना बहुत आवश्यक है। लक्ष्य निर्धारित करने के लिए हमें योग्यताओं का आकलन करना आवश्यक है। ईश्वर ने हरेक इंसान को योग्य बनाया है, लेकिन सब की योग्यताएं अलग-अलग हैं। बस ज़रूरत है तो अपनी रुचि और योग्यता को पहचानने की। कोई अच्छा लेखक बन सकता है, कोई गायक बन सकता है, कोई खिलाडी़ बन सकता है, कोई कलाकार बन सकता है……… वगैरा-वगैरा।
.
चलिए, अब बात करते हैं अपनी योग्यता को पहचानने की। यह सवाल ज्य़ादातर लोगों के ज़हन मे उठता है। इसे पहचानने के लिए आपको सिर्फ यह देखना है  कि आपको कौन सा काम करने में सबसे अधिक आनंद मिलता है, जिसे आप बिना थके, बिना रुके घंटो करते रह सकते हैं। उस कार्य को करते समय आप दुनियादाराी की बाक़ी सभी चीजें भूल जाते हैं। रोजाना वही काम करते रहने के बावजूद, आपको उसमें नयापन दिखाई देता है। उसे करते हुए नित्य-प्रतिदिन आपके दिमाग़ मे नए-नए विचार आते रहते हैं। कभी-कभी लगने लगता है कि शायद वह काम आपके लिए ही बना है, या फिर आप उस काम के लिए ही बने हैं। अगर आप उस काम को करेंगे तो अवश्य सफल होगें।
.
दरसल, हमारा मन बडा़ चंचल होता है। जीवन में लोग अक्सर बाहरी दुनिया से प्रभावित होकर अपने लक्ष्य बनाते हैं। आपने देखा कि फलां इंजिनियर बन गया और आज खूब ठाट-बार से रह रहा है, या वह डाॅक्टर बनकर खूब पैसे बना रहा है, या वह सी.ए. बनकर माल कूट रहा है……वगैरा-वगैरा। इन्हें देखकर लोग इन जैसा ही बनने का प्रयास करने लगते हैं। उनकी देखा-देखी हो सकता है आप डॉक्टर , इंजिनियर या सी.ए. बन भी जाओ, लेकिन शायद उस काम में आप सफल न हो पाओ, या उसे करते-करते आप बोर जाओ, क्योंकि आपने अपनी रुचि से नहीं बल्कि देखा-देखी शुरू किया था। इसके बजाए हो सकता है आप किसी दूसरे काम  के लिए बने हैं जिसे आप पूरा मन लगाकर बहुत अच्छे से कर सकते हैं। इससे आपका फा़यदा तो होगा ही, साथ ही साथ समाज और देश का भी फा़यदा होगा, क्योंकि आप अपना भरपूर योगदान दें पाएंगे।
  .
ऐसा भी नहीं है कि आपने किसी से प्रेरित होकर कोई काम शुरू कर दिया और वह ग़लत ही हो। किसी काम की ओर हमारा झुकाव अक्सर हमारी रुचि और योग्यता के अनुसार ही होता है। हाँ, कभी-कभी पैसे या शोहरत की चकाचैंध को देखकर हम ग़लत निणर्य ले लेते हैं।
.
जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं तो फिर सवाल उठता है उसे हासिल कैसे किया जाए? वैसे इंसान जब कुछ करने की ठान लेता है, तो उसे उसमें सफलता अवश्य मिलती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि आपने कहा कि मैंने ठान लिया और बस आपको लक्ष्य मिल गया। आपके जीवन की यात्रा की असली शुरूआत ही इसके बाद होती है। क्योंकि इस दुनिया मे कोई कोई भी काम आसान नहीं है अगर इसका दूसरा पहलू देखें तो दुनिया का हर काम आसान है।

No comments:

Post a Comment