विनम्रता


झब्बूमल जी एक गुरू के पास पहुंचे और पूछा-“जीवन में भारीपन क्या है और हल्कापन क्या है?”
गुरूजी के पास पीने के पानी का पात्र् रखा था। उन्होंने उस पात्र में पाँच-सात लौंग डाली। पानी में गिरते ही कुछ लौंग पात्र की तली में बैठ गई और कुछ ऊपर तैरने लगीं।
झब्बूमल जी ध्यान से पात्र को देखते रहे और सोचने लगे कि जब सारी लौंग एक-सी हैं तो फिर इनके व्यवहार में इतना अन्तर क्यों! चेहरे पर सवाल  लिए वे गुरूजी की ओर देखने लगे। गुरूजी उनकी उत्सुकता को समझ गए और बोले-“ध्यान से दोनों प्रकार की लौंग को देखो तो तुम्हें तुम्हारे सवाल का जवाब  मिल जाएगा।”
थोडी़ देर तक कौतूहल से झब्बूमल जी इस अजब पहेली को समझने की कौशिश करते रहे और अचानक देखा कि जो लौंग पानी के तल में बैठ गई थीं उनके ऊपर का फूल गा़यब था और जो लौंग ऊपर तैर रहीं थीं, वे साबुत थीं।
तत्काल झब्बूमल जी गुरूजी के संदेश को समझ गए कि टोपी विनम्रता का प्रतीक है, जब तक यह रहती है तो लौंग को ऊँचा रखती है, और जब आदमी की टोपी उतर जाती है तो वो डूब जाता है।

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