अनुगूंज



एक छोटा-सा बच्चा अपनी माँ से नाराज़ हो कर चिल्लाने लगा-“मैं तुम से नफ़रत करता हूँ। मैं तुम से नफ़रत करता हूँ.....”
पिटने के डर से वह घर से भाग गया और पहाडि़यों के पास जाकर चिल्लाने लगा। जब उसने पहाड़ पर जाकर वही वाक्य दोहराया, तो उसी का वाक्य लौट कर उसे सुनाई देने लगा। बच्चे ने पहली बार अनुगूंज सुनी थी।

वह डर गया और लौट कर अपनी माँ के पास आकर बोला-“माँ! घाटी में एक बुरा बच्चा रहता है, जो हमेशा चिल्लाता रहता है कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ।

उसकी माँ सारी बात समझ गई और उसने अपने बेटे से कहा कि वह पहाडी़ पर फिर से जाकर चिल्लाए, लेकिन अबकी बार वह यह कहे कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

छोटा बच्चा डरते-डरते पहाडी़ पर गया और जो़र से चिल्लाया-“मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।क्षण भर में ही पूरी घाटी में यह वाक्य गूंज उठा।

लड़का अपनी ग़लती समझ गया और अपनी माँ की सीख भी उसने गाँठ बांध ली, कि दुनिया हमें वही वापस करती है, जो हम दुनिया को देते हैं। सो, हमें दुनिया के लिए नहीं, खुद के लिए अच्छा बनना है।

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