माँगकर देखिए, मिलेगा

इसमें एक बडी़ सच्चाई है-’माँगकर देखिए, मिलेगा। यह प्रकृति का एक मूल्यवान् सिक्का है। इसके एक पहलू पर लिखा है-’माँगना’ और दूसरे पहलू पर लिखा है-’पाना। आप में से अधिकांश लोग इस सिक्के को पसंद नहीं करते। आप में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इसके एक पहलू ’माँगना’ से तो परिचित हैं, लेकिन दूसरे पहलू से नहीं। आप भगवान से रोज माँगते होंगे, लेकिन आप यह नहीं देख पाते कि आपको पहले ही मिल चुका है। ’माँगना’ ग्राह्य शक्ति को क्रियाशील करने का सबसे अच्छा साधन है।

मालामाल अपने बेटे को ’माँगने’ के महत्व के बारे में बता रहे थे। तभी उधर से एक आदमी आता दिखाई दिया, जो अपने साथ एक हाथी लेकर चल रहा था। मालामाल ने अपने बेटे से कहा, “जाओ, उस आदमी से कहो कि वह हाथी तुम्हें दे दे।” लड़का डर गया। उसने कहा, “आप ही जाइए।” मालामाल तुरंत उस आदमी के पास पहुंचे और बोले , “भाई साहब , क्या आप यह हाथी मुझे मुफ्त में दे देंगे?” वह आदमी भी तुरंत बोल पडा़, “बिलकुल, ये लो।” जैसे वह पहले से ही तैयार बैठा था।

माँगने का परिणाम बिलकुल स्पष्ट होता है-आपको या तो माँगी हुई वस्तु मिल जाएगी या नही मिलेगी। यानी हिसाब-किताब लगाकर देखा जाए तो मिलने की संभावना 50 प्रतिशत होती है इतनी संभावना कम नहीं है। जब आप माँगने की बात पर ज़्यादा सोच-विचार शुरू कर देते हैं-माँगूँ या नहीं माँगूँ-तो आप कई तरह की नकारात्मक स्थितियों से घिर जाते हैं। जहाँ तक मेरी बात है, जब भी मैं माँगता हूँ, मेरा काम शत-प्रतिशत हो जाता है।

आपने देखा होगा कि डाक्टर कभी-कभी शिशु के लिए सलाह देते हैं कि उसे ’माँगने पर’ दूध पिलाया जाए। नन्हा शिशु दूध कैसे माँगता है? चीखता है जिसे सामान्यतया हम बच्चे का रोना कहते हैं। खैर, बच्चे का यह रोना इस बात का संकेत करता है कि माँ के स्तन में दूध का प्रवाह आ गया है। कितना अच्छा तालमेल है! बच्चा जब भी रोता है, उसे दूध मिल जाता है इस प्रकार यही उसका माँगने का तरीका है। हालाँकि बाद में जब वह बडा़ हो जाता है तो उसे सिखाया जाता है कि नम्रतापूर्वक माँगो, ताकि दूसरों को बुरा न लगे।

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