स्पर्श

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एक जगह कुछ सामान नीलाम हो रहा था। सामान में एक पुराना सितार था। जब उस सितार की बोली लगने का नम्बर आया तो आयोजकों ने सोचा कि इस सितार की बोली में समय नष्ट करना उचित नहीं, इस पुराने सितार को जो जितने में भी ख़रीदे, बेच देना चाहिए।
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उसने फटाफट से सितार उठाया और बोला कि जल्दी से इसकी बोली लगाइये। पुराना सितार है इसलिए केवल दो सौ रुपये से इसकी बोली शुरू की जा रही है। आयोजक यह घोषणा कर ही रहा था कि अचानक भीड़ में से निकलकर एक व्यक्ति आगे आया और उसने सितार उठा लिया। उसने जेब से रूमाल निकाल कर सितार की धूल-मिट्टी साफ़ की और फिर सलीके़ से उसे बजाने लगा। उसने सितार के तारों को छुआ ही था, कि सात स्वर वातावरण में बिखर गए। वह काफी़ देर तक मस्ती में सितार बजाता रहा।
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 जब संगीत थम गया तो आयोजक ने धीमी आवाज़ में कहा-“हाँ तो ज़नाब, इस सितार की क्या की़मत होनी चाहिए?”  “तीन हजा़र”-भीड़ में से आवाज़ आई  बोली बढ़ती गई और अंततः वह सितार दस हजार में बिका। पुराने से सितार में सुर भरकर कलाकार ने उसकी की़मत पचास गुना बढा़ दी। यह है स्पर्श का महत्व!
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हीरों से भरा खेत

हफीज अफ्रीका का एक किसान था। वह अपनी जिंदगी से खुश  और संतुष्ट था। ह़फीज खुश  इसलिए था कि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट इसलिए था क्योंकि वह खुश  था। एक दिन एक अक्लमंद आदमी उसके पास आया। उसने हफ़ीज को हीरों के महत्व और उनसे जुड़ी ताकत के बारे मे बताया। उसने हफ़ीज  से कहा, “ अगर तुम्हारे पास अंगूठे जितना बड़ा हीरा हो, तो तुम पूरा शहर खरीद सकते हो, और अगर तुम्हारे पास मुट्ठी जितना बड़ा हीरा हो तो तुम अपने लिए शायद पूरा देश ही खरीद लो।” वह अक्लमंद आदमी इतना कह कर चला गया। उस रात हफ़ीज सो नहीं सका। वह असंतुष्ट हो चुका था, इसलिए उसकी ख़ुशी  भी खत्म हो चुकी थी। .
दूसरे दिन सुबह होते ही हफ़ीज ने अपने खेतों को बेचने और अपने परिवार की देखभाल का इंतजाम किया, और हीरे खोजने के लिए रवाना हो गया। वह हीरों की खोज में पूरे अफ़्रीका में भटकता रहा, पर उन्हें पा नही सका। उसने उन्हे यूरोप में भी ढूँढा, पर वे उसे वहाँ भी नहीं मिले। स्पेन पहुँचते-पहुचँते वह मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्तर पर पूरी तरह टूट चुका था। वह इतना मायूस हो चुका था कि उसने बार्सिलोना (Barcelona) नदी में कूद कर खुदकुशी कर ली।
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इधर जिस आदमी ने हफ़ीज के खेत खरीदें थे, वह एक दिन उन खेतों से होकर बहने वाले नाले में अपने ऊंटों को पानी पिला रहा था। तभी सुबह के वक्त उग रहे सूरज की किरणें नाले के दूसरी ओर पड़े एक पत्थर पर पडी़, और वह इंद्रधनुष की तरह जगमगा उठा। यह सोच कर  कि वह पत्थर उसकी बैठक में अच्छा दिखेगा, उसने उसे उठा कर अपनी बैठक में सजा दिया। उसी दिन दोपहर में हफ़ीज को हीरों के बारे मे बताने वाला आदमी खेतों के इस नए मालिक के पास आया। उसने उस जगमगाते हुए पत्थर को देख कर पूछा, “ क्या हफ़ीज लौट आया ? नए मालिक ने जवाब दिया, “नही, लेकिन आपने यह सवाल क्यों पूछा? ” अक्लमंद आदमी ने जवाब दिया, “ क्योंकि यह हीरा है। मैं उन्हें देखते ही पहचान जाता हूँ।” नए मालिक ने कहा, “नही, यह तो महज एक पत्थर है। मैंने इसे नाले के पास से उठाया है। आइए, मैं आपको दिखाता हूँ। वहाँ पर ऐसे बहुत सारे पत्थर पड़े हुए हैं। उन्होंने वहाँ से नमूने के तौर पर बहुत सारे पत्थर उठाए, और उन्हें जाँचने-परखने के लिए भेज दिया। वे पत्थर हीरे ही साबित हुए। उन्होंने पाया कि उस खेत में दूर-दूर तक हीरे दबे हुए थे।

भाग्य उनकी मदद करता है, जो अपनी मदद खु़द करते हैं

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एक कस्बे में बाढ़ आई। एक आदमी के सिवा वहाँ रहने वाला हर आदमी किसी सुरक्षित स्थान पर जा रहा था। जिस आदमी ने अपनी जगह नहीं छोडी़, उसका कहना था, “मुझे विश्वास है कि भगवान मेरी रक्षा करेगा।” पानी का स्तर बढ़ने पर उसे बचाने के लिए एक जीप आई। पर उस आदमी ने यह कह कर जाने से इन्कार कर दिया, “मुझे विश्वास है कि भगवान मेरी रक्षा करेगा।” पानी का स्तर और बढ़ने पर वह अपने मकान की दूसरी मंजिल पर चला गया। तब उसकी मदद करने के लिए एक नाव आई।
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उस आदमी ने उसके साथ भी यही कह कर जाने से इनकार कर दिया कि “मुझे विश्वास है, भगवान मेरी रक्षा करेगा।” पानी का स्तर बढ़ता जा रहा था। वह आदमी अपने मकान की छत पर चला गया। उसकी मदद के लिए हेलीकाप्टर आया। लेकिन उस आदमी ने अपनी वही बात फिर दुहराई “मुझे विश्वास है, भगवान मेरी रक्षा करेगा।” आखि़रकार वह डूब कर मर गया। भगवान के पास पहुँचने पर उसने उनसे गुस्से भरे लहजे़ में सवाल किया, “मुझे आप पर पूरा विश्वास था, फिर आपने मेरी प्रार्थनाओं को अनसुना कर मुझे डूबने क्यों दिया?” भगवान ने जवाब दिया, “तुम क्या सोचते हो- तुम्हारे पास जीप, नाव और हेलीकाप्टर किसने भेजा था?”
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सौहार्द


झब्बूमल जी को स्वर्ग और नरक, दोनों में घूमने का अवसर दिया गया। पहले झब्बूमल जी नरक में गए। नरक में उपस्थित सभी लोग एक दावत की मेज़ पर बैठे थे। मेज़ तरह-तरह के पकवानों से सजी हुई थी। लेकिन फिर भी किसी के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। उल्लास और खुशी की बजाय सुस्त और उदास बैठे लोग एक-दूसरे का चेहरा देख रहे थे।
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झब्बूमल जी ने ध्यान से देखा तो पाया कि प्रत्येक व्यक्ति की बांई बाजू के साथ खाना खाने का काँटा और दायीं बाजू पर खाना खाने की छुरी बंधी थी। प्रत्येक में चार पायों वाला हैंडल था, जिसके कारण खाना खाना असम्भव हो गया था। इसलिए सभी प्रकार के व्यंजन मौजूद होने के बावजूद, सभी भूखे थे।
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दूसरा पडा़व स्वर्ग का था। वहाँ भी बिल्कुल ऐसा ही दृश्य था। वही खाना, वही हैंडल, वही छुरी, वही काँटें! लेकिन  स्वर्ग के लोग बहुत खुश थे और हँस रहे थे। यह देख  झब्बूमल जी सोचने लगे कि समान परिस्थितियों के बाद भी दोनों जगह के माहौल में इतना अन्तर कैसे! तभी उन्हें अपने सवाल का जवाब भी मिल गया। नरक में प्रत्येक व्यक्ति खाना खाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन छुरी-काँटे हाथ में बन्धे होने के कारण यह असम्भव था।
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स्वर्ग में प्रत्येक व्यक्ति सामने वाले को खाना खिला रहा था । आपसी सौहार्द से उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी खुशियाँ तलाश ली थी।
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निर्णय

गाँव के एक बच्चे ने एक संत को पराजित करने का मन बनाया। इसके लिए उसने एक बचकानी योजना तैयार की। उसने एक पक्षी को अपने हाथ में पकड़ा और संत के पास चल पड़ा।
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उसकी योजना थी कि वह सबके सामने संत से पूछेगा कि पंछी जीवित है या मृत? यदि संत का जवाब ’मृत‘ होगा तो तुरन्त पंछी को उडा़ देगा और यदि संत ने कहा कि पंछी जीवित है, तो चुपचाप पंछी की गर्दन दबा देगा और इस प्रकार संत को गलत सिद्ध कर देगा।
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जब लड़का संत के पास पहुँचा तो गाँव के तीस-चालीस आदमी संत के पास बैठे थे। लड़के जा कर अहंकार भरे स्वर में कहा-“यदि आप सब कुछ जानते हैं, तो मुझे बताइये कि मेरे हाथ में जो पंछी है, वह मृत है या जीवित?”
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संत उसका सवाल सुन कर मुस्कराए और धैर्य पूर्वक बोले-“ये पंछी तुम्हारे हाथ में है, इसका वही होगा जो तुम चाहोगे।”
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संत के जवाब से लड़के को अपनी भूल का अहसास हुआ और उसने कभी  भविष्य मे ऐसा न करने का प्रण लिया।
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हमारा जीवन भी हमारे हाथ में है व सही-ग़लत का फै़सला भी।

भटकाव

जॉन जोन्स न्यूयॉर्क में था । उसे बोस्टन जाना था, इसलिए वह एयरपोर्ट गया और उसने टिकट ख़रीदा। उसकी उडा़न में अभी कुछ समय था, इसलिए वह वहाँ वज़न तोलने की मशीन के पास चला गया। उसने मशीन पर चढ़कर एक सिक्का डाला तो मशीन में से एक पर्ची निकली, जिस पर लिखा था-“आपका नाम जॉन जोन्स है। आपका वज़न 180 पौंड़ है और आप बोस्टन के लिए जाने वाली अगली उडान पकडने वाले हैं। आपकी उडा़न का समय है दो बजकर बीस मिनट।”
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जॉन आश्चर्यचकित रह गया क्योंकि सारी सूचना सही थी। उसे लगा इसमें ज़रूर कोई तिकड़म है। वह दोबारा मशीन पर चढा़ और सिक्का डाला। अबकी बार जो पर्ची निकली पर लिखा था-“आपका नाम अभी भी जॉन जोन्स है। आपका वज़न अभी भी 180 पौंड है और आप अभी भी बोस्टन के लिए दो बजकर बीस मिनट वाली उडा़न पकडने वाले हैं।यह पढ़कर जॉन पहले से भी अधिक परेशान हो गया। उसे विश्वास हो गया कि इसमें अवश्य कोई चाल है। वह प्रसाधन कक्ष में गया अपने कपडे़ बदल डाले। वापस आकर वह दोबारा मशीन पर चढ़ा और सिक्का डाला। हर बार की तरह इस बार भी पर्ची निकली। लेकिन इस बार उस पर्ची पर लिखा था-“आपका नाम अभी भी जॉन जोन्स है, आपका वज़न अभी भी 180 पौंड है, लेकिन आपकी  बोस्टन वाली उडान अभी-अभी छूट गई है।”
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हम अनावश्यक बातों में उलझकर अपनी मंजिल को भूल जाते हैं। यही भटकाव असफलता का मूल कारण है।
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Diabetes And Healing Techniques

Diabetes is a metabolic disorder in which the person suffers from high levels of blood sugar either because of inadequate production of hormone, insulin or inability of the cells of the body to respond to the hormone. The patient experiences frequent urination, general weakness, drowsiness and becomes increasingly thirsty and hungry. Sometimes, they complain of anaemia and constipation. The allopathic treatment of diabetes involves prescription of oral hypoglycaemic drugs which comes with their own side effects. Diabetes can certainly be controlled through these but reversal or complete recovery is unheard of.
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Understanding Causes of Diabetes from Theory of Chakra or Subtle Body System
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Diabetes is associated with energy blockage in Third Chakra, also known as Solar Plexus Chakra or Manipura.
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Solar Plexus Chakra is located between the navel and the base of the sternum. It is associated with the pancreas, gall bladder, liver, spleen, digestives system and nervous system. It is the energy centre for the normal functioning of our stomach and liver area. This acts as the powerhouse for our emotional balance, will power and metabolic energy.
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Bad thoughts and emotions such as anger, insecurity, low self-esteem, fear of being alone and being overly concerned with what others perceive or think, interrupts the normal energy flow in the Solar Plexus Chakra resulting in blockages. This also has psychological influences such as excessive anger or fear, neurotic behaviour, depression and sleep problems.
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Energy (Aura and Chakra) Healing for Diabetes
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Anger, worry and suppressed emotions are considered to be the main culprit for causing energy blockages in Third or Solar Plexus Chakra. The key to activate and purify ‘Manipura’ is happiness. Our body has the ability to heal itself. Using techniques of Psycho Neurobics, we can transfer fresh and vital Cosmo energy from Universe to the blocked chakra. This is commonly known as ‘Chakra Cleansing’ – replacing the blocked energy in chakra with pure ‘prana’ or (life force).
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Healing techniques like the ones listed below helps to heal inner body by removing toxins:
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1. Visualizing yellow colour through third eye activates Solar Plexus Chakra. Yellow represents tolerance, contentment, happiness, wisdom and maturity.
2. Hastamudras such as Agni mudra and Prithvi mudra
3. Breathing Exercises.
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Spending even 20-30 minutes every day practising these techniques especially hastamudras AND COLOUR VISUALIUSATION  can bring a sea change in your health. Seek the advice of our expert healer to learn the  techniques to capture and direct the divine energy to enjoy desired results. You can also avail the facility of distant healing in case you can not come to our center.
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धैर्य

झब्बूमल जी रत्त्न (Gems) परखने की कला सीखना चाहते थे। वे शहर के जाने-माने जौहरी के पास गये और उससे इस हुनर को सीखने का अनुरोध किया। पहले-पहल तो जौहरी ने इनकार कर दिया, लेकिन बार-बार कहने पर उसने उन्हें अगले दिन से आने को कह दिया।
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अगले दिन जब झब्बूमल जी वहाँ पहुँचे , तो जौहरी ने उन्हें एक रत्त्न पकडा़ दिया और अपने काम में लग गया। वह कभी रत्त्नों को काटता, कभी तोलता; लेकिन पूरे दिन में उसने झब्बूमल जी से कोई बात नहीं की। अगले दिन फिर यही हाल रहा। एक सप्ताह तक रोजा़ना झब्बूमल जी काम सीखने की ललक में जौहरी के पास पहुँचते और जौहरी उन्हें एक रत्त्नपकडा़कर अपने काम में व्यस्त हो जाता।
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जब कभी झब्बूमल जी उससे काम सीखने की बात करते तो जौहरी उन्हें कहता कि रोज़ आते रहने से जल्दी ही वे काम में पारंगत हो जाएगें। आखि़रकार झब्बूमल जी के लिए चुप रहना दूभर हो गया। एक दिन उन्होंने तय किया कि आज वे साफ़-साफ़ पूछ लेंगे कि जौहरी उन्हें काम सिखाना भी चाहता है, या नहीं। उस दिन जैसे ही वे जौहरी के पास पहुँचे तो रोज़ की तरह जौहरी ने एक रत्त्न उनके हाथ पर रखा। झब्बूमल जी ने रत्त्न को देखते ही कहा-“यह रोज़ वाला रत्त्न नहीं है।”
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इतना सुनते ही जौहरी मुस्कराते हुए बोला-“आप काम सीखने लगे हो। अब जल्दी ही रत्त्नों की बारीकि़याँ भी समझ लोगे।” झब्बूमल जी का क्रोध हवा हो गया और वे चुपचाप बैठ कर रत्त्न को देखने लगे। वे समझ गए थे कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए धैर्य आवश्यक है।
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सफलता का रहस्य

एक  युवक ने सुकरात से सफलता का रहस्य पूछा? सुकरात ने उससे दूसरे दिन सुबह नदी के किनारे मिलने के लिए कहा। दूसरे दिन युवक सुकरात से मिलने नदी के किनारे पहुँचा, तो उन्होंने उसे नदी की ओर चलने के लिए कहा। जब पानी उनकी गर्दन तक पहुँच गया, तो सुकरात ने अचानक युवक का सिर पानी में डुबो दिया। युवक पानी से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगा, पर सुकरात काफी़ मज़बूत थे। उन्होंने युवक को पानी मे डुबोए रखा। युवक का शरीर जब नीला पड़ने लगा, तब सुकरात ने उसका सिर पानी से बाहर निकाला। सिर पानी से बाहर निकलते ही युवक ने सबसे पहले हवा में एक गहरी सांस ली। सुकरात ने युवक से पूछा, “जब तुम पानी के अंदर थे, तो तुम्हें किस चीज़ की ज़रूरत सबसे ज्य़ादा महसूस हो रही थी?” युवक ने जवाब दिया, “हवा की।” सुकरात ने कहा, ”सफ़लता का यही रहस्य है। जब तुम्हें सफलता हासिल करने की वैसी ही तीव्र इच्छा होगी, जैसी कि पानी के अंदर हवा के लिए हो रही थी, तब तुम्हें सफ़लता मिल जाएगी।”

मिदास का स्पर्श

हम सभी लालची राजा मिदास की कहानी जानते हैं। उसके पास सोने की कमी नहीं थी, लेकिन सोना जितना
बढ़ता, वह और अधिक सोना चाहता। उसने सोने को ख़जाने में जमाकर लिया था, और हर रोज़ उसे गिना
करता था।
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एक दिन जब वह सोना गिन रहा था, तो एक अजनबी कहीं से आया और बोला, “तुम मुझसे ऐसा कोई भी वरदान माँग सकते हो, जो तुम्हें दुनिया में सबसे ज़्यादा खुशी दे।” राजा खुश हुआ, और उसने कहा, “मै चाहता हूँ कि जिस चीज़ को छुऊँ, वह सोना बन जाए।” अजनबी ने राजा से पूछा, “क्या तुम सचमुच यही चाहते हो?”
राजा ने कहा, “हाँ”, तो अजनबी बोला, “कल सूरज की पहली किरण के साथ ही तुम्हें किसी चीज़ को छूकर
सोना बना देने की ताक़त ( Golden Touch ) मिल जाएगी।”
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राजा ने सोचा कि वह सपना देख रहा होगा, यह सच नहीं हो सकता। लेकिन अगले दिन जब राजा नींद से उठा,
तो उसने अपना पलंग छुआ और वह सोना बन गया। वह वरदान सच था। राजा ने जिस चीज़ को छुआ, वही
सोना बन गई। उसने अपनी बिटिया को यह अजूबा दिखाना चाह, और सोचा कि वह ख़ुश होगी। लेकिन बग़ीचे
मे जाने से पहले उसने एक किताब पढ़ने की सोची। उसने जैसे ही उसे छुआ, वह सोने की बन गई। वह किताब
को पढ़ न सका। फिर वह नाश्ता करने बैठा, जैसे ही उसने फलों और पानी के गिलास को छुआ, वे भी सोने के
बन गए। उसकी भूख बढ़ने लगी, और वह ख़ुद से बोला, “मै सोने को खा और पी नहीं सकता।” ठीक उसी समय
उसकी बेटी दौड़ती हुई वहाँ आई, और उसने उसे बाँहों में भर लिया। वह सोने की मूर्ति बन गई। अब राजा के
चेहरे से खुशी गायब हो गई।
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राजा सिर पकड़कर रोने लगा। वह वरदान देने वाला अजनबी फिर आया, और उसने राजा से पूछा कि क्या वह
हर चीज़ को सोना बना देने की अपनी ताक़त से खुश है? राजा ने बताया कि वह दुनिया का  सबसे दुखी इंसान
है। राजा ने उसे सारी बात बताई। अजनबी ने पूछा, “अब तुम क्या पसंद करोगे, अपना भोजन और प्यारी
बिटिया, या सोने के ढेर और बिटिया की सोने की मूर्ति।” राजा ने गिड़गिडा़कर माफी़ माँगी, और कहा, “मै
अपना सारा सोना छोड़ दूँगा, मेहरबानी करके मेरी बेटी मुझे लौटा दो, क्योंकि उसके बिना मेरी हर चीज़
मूल्यहीन हो गई है। अजनबी ने राजा से कहा, “तुम पहले से बुद्धिमान हो गए हो।” और उसने अपने
वरदान को वापिस ले लिया।
राजा को अपनी बेटी फिर से मिल गई, और उसे एक ऐसी सीख मिली जिसे वह जिंदगी-भर नहीं भुला सका।

सोने से तीन फुट दूर(सोचिये और अमीर बनिये बुक लेखक नेपोनियन हिल)

आर.यू.डार्बी के एक अंकल गोल्डरश के दौर में ” स्वर्ण की खोज के अभियान” में जुट गये। वे खुदार्इ करने और अमीर बनने के लिये पशिचम दिशा में गये। वे नहीं जानते थे कि धरती के नीचे जितना सोना छुपा है उससे कहीं ज़्यादा सोना इन्सानों के विचारों में छुपा है। वे तो कुदाली-फावडा़ लेकर ज़मीन के एक टुकडे़ पर खुदार्इ करने में जुट गये। .
कर्इ सप्ताह की मेहनत के बाद उन्हें चमकते हुये स्वर्ण की झलक दिखार्इ दी। परंतु उस सोने को सतह तक लाने के लिये मशीनों की ज़रूरत थी। चुपचाप उन्होंने खदान का मुँह ढँक दिया और मैरीलैंड के विलियम्सबर्ग के अपने घर मैं लौट आये। उन्होंने अपने रिश्तेदारों और कुछ दोस्तों को ” सोने की खुदार्इ में सफलता ” के बारे मे बताया। उन्होंने मिलकर मशीनों को ख़रीदने के लिये आवश्यक धन जुटाया। अंकल और डार्बी खदान पर काम शुरू करने के लिये वापस लौटे।
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कच्ची धातु की पहली खेप को स्मेल्टर तक पहुँचाया गया। वहाँ यह पता चला कि उनकी खदान कालोरेडो की सबसे बढि़या खदान थी। कच्ची धातु की कुछ खेपों में ही उनके सारे कर्जे़ उतर जाते। फिर भारी मुनाफे़ की बारी आती।
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खुदार्इ मशीनें नीचे जा रही थीं। डार्बी और अंकल की आशायें आसमान छू रही थीं। तभी अचानक कुछ हुआ। सोने की झलक गा़यब हो गर्इ। वे इन्द्रधनुष के आखि़री सिरे पर आ गये थे और स्वर्ण पात्र अब वहाँ नहीं था। वे खोदते रहे, इस आशा में कि एक बार फिर सोने की झलक दिख जाये-परंतु उनकी मेहनत बेकार गयी। आखि़रकार, उन्होंने मैदान छोडने का फैसला किया।
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उन्होंने एक कबाडी़ को मशीनें कौडियों के मोल बेच दीं और टे्रन पकड़कर वापस घर लौट आये। कबाडी़ ने एक माइनिंग इंजीनियर को बुलवाकर खदान का इन्स्पेक्शन करवाया। इंजीनियर ने सलाह दी कि यह प्रोजेक्ट इसलिये असफल हुआ क्योंकि इसके मालिक यह नहीं जानते थे कि बीच में “फाल्ट लाइन” आती है। उसके विश्लेषण के अनुसार सोने की झलक उस स्थान से मात्र तीन फुट नीचे थी जहाँ डार्बी ने खुदार्इ बंद की थी। और इंजीनियर का अनुमान सच साबित हुआ।
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कबाडी़ को खदान से लाखों-करोडों डालर का सोना मिला, सिर्फ इसलिये क्योंकि वह जानता था कि हार मानने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित होता है।

Part 3 of Chakra of Life

Chakras and Diseases
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Well balanced, harmonious and healthy chakras are the key to holistic health – physical, emotional and psychological. The physical state of our body is actually the reflection of our emotions, thoughts and attitude towards other people, events and life as a whole. Have you ever thought why only certain people fall ill and not others? Why is it that some patients respond better to medicine and get cured while others succumb to the disease? If you have not, then this is the time to ponder over such things happening around you.
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These arguments create a solid ground for the role of chakras in our health and wellbeing. This tells us that there is something more than what has been revealed by the traditional medical practice. In combination to the organ system, there is something else that controls the functioning of human body. Our physical body is the manifestation of inner self and consciousness.
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Any energy blockages, holes and distortions in the Chakras results in their malfunctioning or lack of synchronization between different components of energy systems – auras, chakras, Nadis and meridians.
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Various causes of Chakra blockages are:
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  • Negative thoughts, emotions and attitude
  • Repressed emotions and feelings
  • Stress
  • Toxins such as chemicals, drugs, alcohol and cigarette smoking etc.
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Malfunctioning of chakras manifest as physical illness, mental disorders or emotional setbacks. Consider the body parts and organs associated with each chakra; signs of a balanced chakra and diseases or illnesses caused by an unbalanced chakra.
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The below table depicts the corresponding body parts and diseases with each chakra
 Picture1
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Balancing the Chakras
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There are various methods through which we can restore the health of chakras – correcting the imbalance and maintaining the vitality. Few of them are briefly discussed below:
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1. Reiki is a technique of energy exchange in which the healer directs energy from the Universe towards the patient via himself. This energy can then be channelized to different parts of the body. This helps to stimulate the natural healing abilities of the body, balancing the life energies and thus improves the health. A highly useful technique for stress reduction and relaxation, it helps to relieve pain, enhance immune system and increase vitality.
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2. Colour Therapy is a technique that uses vibrational energy from colours to activate the chakras and bring peace and harmony in mind-body-soul. It is also known as chromo therapy. Specific colours as single or in combinations trigger self-healing. Most visible effect of colours can be seen in their impact on mood.
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3. Yoga especially Kundalini Yoga helps to awaken the powerful dormant Kundalini energy. There are specific asanas, mudras and pranayama exercises that when practiced clears the associated chakras, bringing improved health.
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4. Other methods such as meditation, visualization, positive thinking, affirmations, crystal therapy and aromatherapy also have similar effects on chakras balancing.

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About Hope Academy
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Hope Academy is a Delhi-based Life Coaching and Spiritual Healing consultancy that has been helping people to transform their life. It was founded by Arun Saraf, who is a professional motivator, mentor and transformation specialist. Clients appreciate Hope Academy for its innovative solutions, excellent service quality and personalized attention. It has catered to both Indian and International clients from all walks of life – professionals, housewives, corporates, students, government employees, businessmen among many others. Through its vast array of products and services, Hope Academy is helping people to uproot their prolonged illnesses and psychological issues, enabling them to lead a happier, prosperous and longer life.
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It prides in its team comprising of – Arun Saraf (Mind Power Trainer),  Rachna Saraf (Psycho Nerobics expert and Spiritual healer),  Dr. Chandrashekhar (Creator of Psycho Neurobics), Seema Bhardwaj (Reiki Healer),  Shuchita Dhawan ( Personality Development and Emotion councilor.
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It offers following products & services:
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 1.  Money Chalisa book and CD to attract money
 2. Health Chalisa Self-Healing CD to attract health
 3. Relaxation and Meditation Audio CD for stress management
 4. Visualization for Relationship Audio CD for healthy relationships
 5. Aura & Chakra Reading through latest Aura Resonant Imaging technique
 6. Reiki Workshop for stress management and Chakra healing
 7. Hypnosis Workshop
 8. Psycho Neurobics for cure of diseases such as arthritis, diabetes, hypertension and weight management
 9. Memory Workshop for positive thinking and enhancing mind power  through principles of law of attraction and power of subconscious mind
10.One on One session on Parenting, Relationships and Past Life Regression
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’कोई किसी से कम नही’

आज के भागदौड़ भरे इस जीवन में हम अपने आप को भूलते जा रहे हैं। एक दूसरे से आगे निकलने की एक होड़ सी लगी हुई। लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें जाना कहाँ है? बस दूसरे को देखा-देखो चले जा रहे हैं। अगर हमें अपनी मंजिल का ही पता नहीं होगा तो फिर हम उस तक पहुचेंगे  कैसे।
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हमें अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना बहुत आवश्यक है। लक्ष्य निर्धारित करने के लिए हमें योग्यताओं का आकलन करना आवश्यक है। ईश्वर ने हरेक इंसान को योग्य बनाया है, लेकिन सब की योग्यताएं अलग-अलग हैं। बस ज़रूरत है तो अपनी रुचि और योग्यता को पहचानने की। कोई अच्छा लेखक बन सकता है, कोई गायक बन सकता है, कोई खिलाडी़ बन सकता है, कोई कलाकार बन सकता है……… वगैरा-वगैरा।
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चलिए, अब बात करते हैं अपनी योग्यता को पहचानने की। यह सवाल ज्य़ादातर लोगों के ज़हन मे उठता है। इसे पहचानने के लिए आपको सिर्फ यह देखना है  कि आपको कौन सा काम करने में सबसे अधिक आनंद मिलता है, जिसे आप बिना थके, बिना रुके घंटो करते रह सकते हैं। उस कार्य को करते समय आप दुनियादाराी की बाक़ी सभी चीजें भूल जाते हैं। रोजाना वही काम करते रहने के बावजूद, आपको उसमें नयापन दिखाई देता है। उसे करते हुए नित्य-प्रतिदिन आपके दिमाग़ मे नए-नए विचार आते रहते हैं। कभी-कभी लगने लगता है कि शायद वह काम आपके लिए ही बना है, या फिर आप उस काम के लिए ही बने हैं। अगर आप उस काम को करेंगे तो अवश्य सफल होगें।
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दरसल, हमारा मन बडा़ चंचल होता है। जीवन में लोग अक्सर बाहरी दुनिया से प्रभावित होकर अपने लक्ष्य बनाते हैं। आपने देखा कि फलां इंजिनियर बन गया और आज खूब ठाट-बार से रह रहा है, या वह डाॅक्टर बनकर खूब पैसे बना रहा है, या वह सी.ए. बनकर माल कूट रहा है……वगैरा-वगैरा। इन्हें देखकर लोग इन जैसा ही बनने का प्रयास करने लगते हैं। उनकी देखा-देखी हो सकता है आप डॉक्टर , इंजिनियर या सी.ए. बन भी जाओ, लेकिन शायद उस काम में आप सफल न हो पाओ, या उसे करते-करते आप बोर जाओ, क्योंकि आपने अपनी रुचि से नहीं बल्कि देखा-देखी शुरू किया था। इसके बजाए हो सकता है आप किसी दूसरे काम  के लिए बने हैं जिसे आप पूरा मन लगाकर बहुत अच्छे से कर सकते हैं। इससे आपका फा़यदा तो होगा ही, साथ ही साथ समाज और देश का भी फा़यदा होगा, क्योंकि आप अपना भरपूर योगदान दें पाएंगे।
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ऐसा भी नहीं है कि आपने किसी से प्रेरित होकर कोई काम शुरू कर दिया और वह ग़लत ही हो। किसी काम की ओर हमारा झुकाव अक्सर हमारी रुचि और योग्यता के अनुसार ही होता है। हाँ, कभी-कभी पैसे या शोहरत की चकाचैंध को देखकर हम ग़लत निणर्य ले लेते हैं।
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जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं तो फिर सवाल उठता है उसे हासिल कैसे किया जाए? वैसे इंसान जब कुछ करने की ठान लेता है, तो उसे उसमें सफलता अवश्य मिलती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि आपने कहा कि मैंने ठान लिया और बस आपको लक्ष्य मिल गया। आपके जीवन की यात्रा की असली शुरूआत ही इसके बाद होती है। क्योंकि इस दुनिया मे कोई कोई भी काम आसान नहीं है अगर इसका दूसरा पहलू देखें तो दुनिया का हर काम आसान है।

Part 2 of Chakra of Life

Kinds of Chakra
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1. Root Chakra – ‘Muladhara’ – Survival & Stability
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Root Chakra is located near the base of the spine. It is considered to be the base or root of all chakras, hence the name. This Chakra rules our physical energy and is associated with our emotional needs for day to day survival instincts. It is related to security, passion, vitality and energy. It regulates the adrenal gland and release of adrenaline hormone, which is associated with ‘fight and flight’ in fear and anxiety. When the Chakra is balanced we feel secure, stable and grounded; under activity makes us fearful and nervous; and over activity results in greed and materialistic outlook towards life.
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2.  Sacral Chakra – ‘Swadhishtana’ – Sexuality
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Sacral Chakra is the second chakra and is located near tailbone in the area of navel and lower abdomen. It governs are emotions and feelings, is often associated with sexuality and sensuality. It closely works with reproductive system. At psychological level, it manifests in creativity, sexuality, happiness, self-love, pleasure, ambition, empathy, change, warmth and intimacy. It allows one to enjoy the life, achievements and relationships. When the Sacral Chakra is balanced one is better able to go along with the life’s flow and accept the changes in life; under activity makes one stiff and rigid and over activity makes one extremely emotional. The malfunctioning of this second chakra makes one feel unloved and fall prey to addictions to alcohol, drugs and smoking.
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3. Solar Plexus Chakra – ‘Manipura’ – Self Esteem
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Solar Plexus Chakra is the third primary chakra in human energy system. It is located in the lower abdomen below navel and digestive system. This acts a storehouse of energy and is associated with psychological influences of power, will power, dynamic nature, movement, initiative, risk-taking and go-getter attitude. It controls our sense of self-esteem and authority. In terms of endocrine system, it relates to pancreas, digestive system and adrenal cortex (outer part of adrenal glands). Thus the third chakra has an influence on our digestion and metabolism. When it is open, one feels in control of oneself and has sufficient self-esteem; under activity makes one passive and timid; and over activity generates a domineering and aggressive attitude.
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4.  Heart Chakra – ‘Anahata’ – Love and Compassion
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It is the fourth chakra and is located at the heart. It helps one to take decisions by what we say ‘follow your heart’. It is associated with one’s higher self and does not arise from the unfulfilled emotions or materialistic desires. It guides the emotions such as those of unconditional love, compassion, forgiveness, acceptance of surroundings and a deep sense of peace and harmony with nature. The associated endocrine gland is thymus. When it is open, one feels compassionate, being loved and able to develop harmonious relationships; under activity makes one cold and detached and over activity leads of suffocation of other people by too much love. It is related to negative emotions of bitterness, greed and thoughtlessness.
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5. Throat Chakra – ‘Vishuddhi’ – Communication
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This is the fifth chakra and is located in the neck region, close to the spine. It is also referred to as Purification Centre. It is closely related to the sensory functions of hearing and speaking. In the endocrine system, it is connected to thyroid gland and produces hormone thyroxin which is essential for growth and maturation. It governs communication, creativity and self-expression. It helps one gain clarity between what is wrong and right for oneself thus facilitates formation of our belief system.  When it is open, one finds it very easy to express oneself; under activity affect the power of speech and makes on introvert; and over activity manifests as being a bad listener and dominating attitude. A balanced throat chakra increases self-confidence and makes one decisive.
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6. Third Eye Chakra – ‘Ajna’ – Intuition
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This is the sixth chakra and is situated in the brain, directly behind the centre of the forehead. Its activation region is in the eyebrow, at the position of third eye. The energy from this chakra translates into intuition and intellect. The associated sensory organ is the mind. The nature of Ajna Chakra is largely mental and it is related to inner visions, mysticism and clairvoyant abilities. When it is open, individual is able to get a gut feeling of things happening around him; under activity leads to confusion and over activity results in fantasy and hallucination.
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7. Crown Chakra –‘Sahasrara’ – Connection/Union
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This is the seventh primary chakra and is also known as ‘Crown Chakra’ because it is located at the top of the head. This symbolizes detachment from illusion and helps one to achieve higher consciousness. In endocrine system, it is linked to pineal and pituitary gland. When balanced and acknowledged it creates a state of ultimate bliss and one transcends from the physical world to integrate with greater self or divine energy. When open, it makes one aware of oneself in relation to the world; under activity results in being completely unaware of spirituality and over activity causes giving up bodily needs. This is majorly responsible for complete harmony of mind-body-soul.
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The table below describes the key features of each Chakra.
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Watch out this space for more on overcoming diseases through chakra healing On 17th August 2013

CHAKRAS OF LIFE

Introduction
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Spiritual healing is gaining stronger grounds as more and more finds the side effects and limitations of traditional medicine. Many people have experienced the benefits of spiritual healing in overcoming prolonged illnesses and restoration of general wellbeing. The benefits are realized only when one strongly believes in the power of alternative therapy, which comes only when you are aware where it originates from and how it heals.
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With the above background, Hope Academy brings forth this eBook on Chakras of Life to shed light on the human chakra system to help its readers gain a better understanding of the invisible (to a naked eye) components of human body.  This book answers lot of questions and doubts one has about the Chakras and the role they play in human health.
Questions Addressed
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1. Why should I know about Chakras?
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2. What does Chakras mean?
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3. Which are the seven primary Chakras?
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4. What is the role played by each of the 7 Chakras in our health?
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5. How malfunctioning of Chakra causes diseases?
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6. How can Chakras be healed and balanced?
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Following will benefit immensely from this eBook:
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1. Those who are suffering from any disease such as diabetes, heart troubles, arthritis, depression and cancer etc. and are unable to find relief from traditional medical treatment.
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2. Those who practice or are learning to practice spiritual healing and alternative therapy.
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3. Those who wish to enhance their personal knowledge and awareness about this discipline.
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It addresses following issues in a simple and easy to understand manner.
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Drawing upon the personal and professional experience/qualifications of our trainers, Chakras of Life presents practical tips to transform one’s health.
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Read on for a better and healthier you!
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Why should I know about Chakras?
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Humans have an intrinsic energy system that takes care of the proper functioning of the body’s organ system. They are responsible for good health and wellbeing. Chakras act as the connection between our physical body and metaphysical elements in the Universe.
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There are various reasons why one should know about the Chakra System as given below:
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1. To enhance one’s self awareness of how our emotions, thoughts and attitudes affect our overall health.
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2. It provides a different perspective to understand the causes of illness.
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3. It sheds light on basics of alternative medicine to cure diseases.
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4. It helps one to lead a more holistic and fulfilling life.
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Understanding Chakras
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Chakras is defined as the spinning or rotating wheels of electromagnetic energy at certain specific positions in human body. These are also known as ‘Energy Centres’ or Energy Points’. These act as the gateways or exchange points for energy. They are the links between the Aura and the organs of our body i.e. subtle and physical nature of human body.
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Aura absorbs the cosmic energy from Universe which is collected and processed at these central points and then distributed to various body parts through a system of channels known as Nadis and Meridians. High frequency energy, vibrating at an optimal level, is only suitable for our body processes. So chakras release the high frequency to the physical body and pulls back the low frequency energy for conversion. This high frequency energy is actually the life force, known as ‘Prana’ which are so essential for wellbeing of humans.
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Chakras are connected to our endocrine system which regulates the release of hormones that regulate all the processes of our body. There are seven main Chakras and seven endocrine glands, that is to say, each Chakra is associated with one particular endocrine gland.
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There are innumerable chakras in our body but the most prominent are only seven which are connected to the spinal cord and head.
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These seven main Chakras are as following:
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1. Root Chakra
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2. Sacral Chakra
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3. Solar Plexus Chakra
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4. Heart Chakra
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5. Throat Chakra
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6. Third Eye Chakra
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7. Crown Chakra

In the next instalment we will look at each of these Chakras in greater details on 16th August 2013.

विनम्रता


झब्बूमल जी एक गुरू के पास पहुंचे और पूछा-“जीवन में भारीपन क्या है और हल्कापन क्या है?”
गुरूजी के पास पीने के पानी का पात्र् रखा था। उन्होंने उस पात्र में पाँच-सात लौंग डाली। पानी में गिरते ही कुछ लौंग पात्र की तली में बैठ गई और कुछ ऊपर तैरने लगीं।
झब्बूमल जी ध्यान से पात्र को देखते रहे और सोचने लगे कि जब सारी लौंग एक-सी हैं तो फिर इनके व्यवहार में इतना अन्तर क्यों! चेहरे पर सवाल  लिए वे गुरूजी की ओर देखने लगे। गुरूजी उनकी उत्सुकता को समझ गए और बोले-“ध्यान से दोनों प्रकार की लौंग को देखो तो तुम्हें तुम्हारे सवाल का जवाब  मिल जाएगा।”
थोडी़ देर तक कौतूहल से झब्बूमल जी इस अजब पहेली को समझने की कौशिश करते रहे और अचानक देखा कि जो लौंग पानी के तल में बैठ गई थीं उनके ऊपर का फूल गा़यब था और जो लौंग ऊपर तैर रहीं थीं, वे साबुत थीं।
तत्काल झब्बूमल जी गुरूजी के संदेश को समझ गए कि टोपी विनम्रता का प्रतीक है, जब तक यह रहती है तो लौंग को ऊँचा रखती है, और जब आदमी की टोपी उतर जाती है तो वो डूब जाता है।

अनुगूंज



एक छोटा-सा बच्चा अपनी माँ से नाराज़ हो कर चिल्लाने लगा-“मैं तुम से नफ़रत करता हूँ। मैं तुम से नफ़रत करता हूँ.....”
पिटने के डर से वह घर से भाग गया और पहाडि़यों के पास जाकर चिल्लाने लगा। जब उसने पहाड़ पर जाकर वही वाक्य दोहराया, तो उसी का वाक्य लौट कर उसे सुनाई देने लगा। बच्चे ने पहली बार अनुगूंज सुनी थी।

वह डर गया और लौट कर अपनी माँ के पास आकर बोला-“माँ! घाटी में एक बुरा बच्चा रहता है, जो हमेशा चिल्लाता रहता है कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ।

उसकी माँ सारी बात समझ गई और उसने अपने बेटे से कहा कि वह पहाडी़ पर फिर से जाकर चिल्लाए, लेकिन अबकी बार वह यह कहे कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

छोटा बच्चा डरते-डरते पहाडी़ पर गया और जो़र से चिल्लाया-“मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।क्षण भर में ही पूरी घाटी में यह वाक्य गूंज उठा।

लड़का अपनी ग़लती समझ गया और अपनी माँ की सीख भी उसने गाँठ बांध ली, कि दुनिया हमें वही वापस करती है, जो हम दुनिया को देते हैं। सो, हमें दुनिया के लिए नहीं, खुद के लिए अच्छा बनना है।